सुरेश चंद्र शर्मा के चचेरे भाई ने अपने जीवनदान के संकल्प के बाद भी भाई के परिवारको संभाला और भाई के नाम को बरेली के इतिहास और भविष्य में भी अमर कर दिया।
प्रेमप्रकाश शर्मा ने भाई ने नाम पर बरेली की सबसे पहली विकसित बी. डी.ए.. एप्रूव्ड कालोनी सुरेश शर्मा नगर के नाम से बनवायी। भाई का एक स्मारक बनवाया। भाई के नाम से स्कूल खोले, प्रिटिंग प्रेस लगवायी।
अलीगढ़ के ग्राम नरहरपुर में जमीदार दुर्गा प्रसाद शर्मा रहते थे। उनकी दो संताने हुई वासुदेव शर्मा और मोहन लाल शर्मा वासुदेव शर्मा का विवाह कालांतर में महादेवी शर्मा से हुआ और उनके एक पुत्र 1949 में सुरेश चंद्र शर्मा और पुत्री मंजू लता हुई। मोहनलाल शर्मा की चार संताने हुई लेकिन उनमें से एक भी नहीं बची। अल्पकाल में ही बच्चे काल के गाल में समा जाते। तब हन्होंने एक बच्चे को गोद लिया और उस दत्तक पुत्र का नाम प्रेम प्रकाश शर्मा रखा अलीगढ़ में ही पढ़ने लगे। अलीगढ़ में ही सुरेश शर्मा छात्र संघ की राजनीति में धीरे धीरे सक्रिय होने लगें। वहीं सुरेश चन्द्र शर्मा एवं प्रेम प्रकाश शर्मा को कल्याण सिंह भी मिल गए। कल्यान सिंह का जन्म भी अलीगढ़ में हुआ था। कल्याण सिंह भी अलीगढ़ की राजनीति में दाखिल हो रहे थे। कल्याण सिंह के साथ-साथ सुरेश शर्मा भी आर.आर.एस. से जुड़ गए और उसके साथ ही अखिल भारतीय परिषद से भी जुड़कर अलीगढ़ में छात्र राजनीति करने लगे। पिता वासुदेव शर्मा बेटे सुरेश चंद्र शर्मा को आई.ए.एस बनाने का सपना पाले बैठे थे। सुरेश चंद्र शर्मा का छात्र राजनीति में गहरा रूझान देखकर उनको चिंता हुई और उन्होंने सुरेश चंद्र के बारे में सोचना शरू किया। बरेली में वासुदेव शर्मा के भतीजे प्रकाश चन्द्र शर्मा रहा करते थे। वह बरेली के आर.टी. ओ. में अधिकारी थे और छोटी बमनपुरी में रहते थे। बरेली कालेज का भी शिक्षा के क्षेत्र में दूर दूर तक नाम था। वासुदेव शर्मा को यही समझ आया कि सुरेश शर्मा को अलीगंढ़ की राजनीति से हटाने के लिए उन्हें कहीं और भेजना ही ठीक रहेगा तो सुरेश चंद्र को बरेली में बीएससी करने के लिए भेज दिया। प्रेम प्रकाश शर्मा अपने र्भाई सुरेश शर्मा से बहुत प्रेम करते थे वह भी उनके साथ बरेली आ गए। अब दोनों भाईयों ने बीएससी में दाखिला लिया और छोटी बमनपुरी में ही बड़े भाई प्रकाश चंद्र शर्मा ने एक मकान दिला दिया वहीं ये दोनो रहने लगे। प्रेम प्रकाश ने बीएससी के बाद एलएलबी किया और सुरेश चंद्र ने बीएससी के बाद फिजिक्स में एमएमससी और एलएलबी व बीएड भी किया। राजनीति सुरेश शर्मा के खून में प्रवाहित थी ही तो बरेली में छात्र राजनीति करने लगे थे।
बरेली कॉलेज में अब तक एनएसयूआई का ही प्रभावशाली वर्चस्व था। सुरेश शर्मा चूँकि कल्याण सिंह के साथ अलीगढ़ में ही एबीवीपी से जुड़ चुके थे उस समय बरेली के लिए ए.बी.वी.पी. नई चीज थी लेकिन आश्चर्यजनक रूप से 1969 के छात्र संघ चुनाव में बरेली कालेज से सुरेश चंद्र शर्मा छात्र संघ के अध्यक्ष बन जाते हैं। छात्र संघ का अध्यक्ष बन जाना तक तो ठीक था लेकिन इस मौके को सुरेश शर्मा ऐतिहासिक रंग देते हैं। वह अपने शपथ ग्रहण समारोह में भारत के बड़े-बड़े राजनेताओं को आमंत्रित करते हैं और घोर आश्चर्य यह था कि वो तमाम राजनेता सुरेश चंद्र शर्मा के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बरेली भी आते हैं। वह भारतीय राजनीति के तत्कालीन राष्ट्रपति बी. वी. गिरी, तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी, उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरूप पाठक, पंडित नारायण, दत्त तिवारी, हेमवती नंदन बहुगुणा, कमलापति त्रिपाठी, डा. करण सिंह, खाने अब्दुल गफ्फार खान, राष्ट्रीय सेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी मदन दास देवी जी, बांबू जगजीवन राम, जैनेद्र जैन जैसी अनेको हस्तियों को बरेली आमंत्रित करते है और इनमें से कुछ इनके पहले शपथ ग्रहण समारोह में तो कुछ बाद के शपथ ग्रहण समारोह में बरेली आते हैं। सुरेश चंद्र शर्मा 1969 छात्र संघ के चुनाव के बाद लगातार दो बार 1970-71, 71-72 के लिए बरेली कॉलेज छौंत्र संघ के अध्यक्ष बनते हैं। चौथी बार का चुनाव इसलिए छोड़ देते हैं कि इसी बीच 1973 में उनकी नौकरी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में लंग जाती है और वह स्टेट बैंक के मैनेजर होकर पीलीभीत में पोस्टिंग पा जाते हैं। बरेली कालेज के छात्र संघ चुनाव से सुरेश चंद्र शर्मा का कद बढ़ जाता है। नारायण दत्त तिवारी और रामसिंह खन्ना का भरपूर साथ और प्यार उन्हें मिलता है वह जीवन भर उनके साथ बना रहता है। इसके साथ साथ बड़े बड़े राजनेताओं से उनके आत्मीय संबंधों के कारण से उनकी गिनती देश के प्रमुख छात्र नेताओं में भी होने लगती है। अटल बिहारी बाजपेयी भी उनको व्यक्तिगत रूप से जानते थे और उनकी राजनीति को पसंद करते थे। अटल बिहारी बाजपेयी से नजदीकी के कारण सुरेश चंद्र शर्मा को बहुत पसंद किया जाने लगा।
अपने अध्यक्ष के कार्यकाल में उन्होंने बरेली में एक बहुत शानदार म्यूजिकल प्रोग्राम बरेली कॉलेज में किया। जिसमें फिल्मी संसार के महान पार्श्व गायक किशोर कुमार, गजल गायक तलत महमूद, अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित, राजकुमार, महेश कुमार को बरेली आमंत्रित किया और बरेली वासियों को उनकी धुनों पर झूमने को विवश कर दिया। यह एक बहुत बड़ा सफल आयोजन उन्होंने बरेली कॉलेज में किया। सुरेश चंद्र शर्मा ने पूरे रूहेलखण्ड में एक अभियान रिवॉल्यूशन इन एजुकेशन कैंपेन भी चलाया था जो कि बहुत सार्थक साबित हुआ था। बरेली कालेज तब आगरा विश्वविद्यालय के अधीन आया करता था। आगरा यूनविर्सिटी के अंतर्गत तब 80 विद्यालय आया करते थे तब सुरेश चंद्र शर्मा ने मुहिम छेड़ी कि रोहिलखंड विद्यालयों के लिए एक अलग विश्वविद्यालय बनाया जाये तो सुरेश चंद्र शर्मा द्वारा पहली बार रोहिलखंड यूनिवर्सिटी के लिए आवाज उठाई गई थी। जो बाद में एक आंदोलन में बदली और रोहिलखंड विश्वविद्यालय अपने स्वरूप में बरेली की सरजमीन पर उतरा। सुरेश चंद्र शर्मा नें अध्यक्ष रहते हुए बरेली कालेज से गुंडागर्दी को खत्म करने का पूरा प्रयास किया। और छात्राओं के पढ़ने के लिए एक साफ-सुथरा शैक्षिक वातावरण तैयार किया। सुरेश शर्मा राष्ट्रीय एकता परिषद के और युवा संघ के राष्ट्रीय सचिव थे बरेली मंडल के तरूण शांति सेना और शिक्षा में क्रांति अभियान के संयोजक भी बने रहें।
दो साल बैंक के मैनेजर की नौकरी करने के साथ ही सुरेश चंद्र अपने भविष्य के तरक्की के लिए और भी इम्तिहान दे रहे थे। इस बीच 1976 में उनका सलैक्शन एक्साइज ऑफिसर के रूप में हो गया। उत्तर प्रदेश एक्साइज की नौकरी में वह रामपुर, बरेली, मुरादाबाद, कासगंज, की पोस्टिंग पर भी रहे। सुरेश चंद्र शर्मा एक शौकीन व्यक्ति रहे अपने शौक के लिए उन्होंन एक नई जीप खरीदी थी। बरेली में तब कारों में लगने वाले एसेसरीज मिलती नहीं थी जो नई जीप को सजाने के लिए उसे दिल्ली ले गए। वहां जीप में बढ़िया क्वालिटी का स्टीरियों सिस्टम और बाकी सामान लगवा कर बरेली वापस आ रहे थे कि बुलंदशहर में उनकी एक भयानक दुर्घटना हुई और इसमें उनकी मृत्यु हो गई। यह 4 मई 1980 की बात है। सुरेश चंद्र शर्मा का विवाह अलीगढ़ की ही ऊषा जी से हुआ था और उनके एक पुत्र और दो पुत्रिया थी। बड़ी पुत्री अंजली, दूसरा पुत्र साकेत सुधांशु व तीसरी पुत्री निधि हैं। साकेत सुधांशु की आयु उस समय मात्र डेढ़ वर्ष की थी।
इस बीच सुरेश चंद्र के चचेरे भाई प्रेम प्रकाश शर्मा अपने जीवन को आध्यात्मिकता की तरफ ले गए थे। विनोबा भावे से प्रभावित होकर उन्होंने अपना जीवन सेवा के लिए दान कर दिया था तो इस जीवनदान के कारण जीवन भर वो अविवाहित भी रहे। 1975 से 1980 तक जब सुरेश चंद्र यहां बरेली में अपने जीवन के तमाम क्रियाकलाप कर रहे थे।. तब प्रेम शर्मा कन्या कुमारी में स्वामी विवेकानंद केंद्र में अपनी सेवायें दे रहे थे। इस समय पूरे भारत में कई परीक्षाओं के बाद केंद्र के लिए सेवादार चुने जा रहे थे। उस समय एकनाथ रानाडे संघ के प्रचारक थे तमाम कठिन परीक्षाओं के बाद पूरे भारत से उस केंद्र के लिए पांच लोगों का चुनाव होता है। इसमें से एक प्रेम प्रकाश शर्मा भी होते हैं। इस बीच प्रेम प्रकाश आचार्य महेश योगी के साथ भी कुछ समय रहे और अपने संत जीवन में वह अनेक योगियों और संतों के संपर्क में वह लगातार बने रहे।
प्रेम प्रकाश शर्मा ने यूं तो अपना जीवन आध्यात्मिकता को समर्पित कर दिया था लेकिन भाई की असमय मृत्यु ने प्रेम प्रकाश शर्मा को झकझोर कर रख दिया वह वापस घर बरेली लौटकर आए। भाई का परिवार कच्चा था तो इस परिवार को सहारा देने के लिए प्रेम प्रकाश शर्मा ने छोटी बमनपुरी में एक विद्यालय श्री सुरेश शर्मा स्मारक विद्यापीठ बनाया और एक प्रिन्टिंग प्रेस प्रेमांजली प्रिन्टिंग प्रेस और एक साकेत शर्मा प्रिन्टर्स के नाम प्रिन्टिंग प्रेस लगाई। विद्यालय और प्रिन्टिंग प्रेस दोनों ही चलने लगे। अब प्रेम प्रकाश ने अपने भाई सुरेश चंद्र की स्मृति के लिए बड़ी योजना बनाई बरेली शहर से बाहर उन्होंने जमीन खरीदी और सुरेश शर्मा नगर की स्थापना की। उस समय तक उत्तर प्रदेश में प्राइवेट कॉलोनी का कोई नामोनिशान नहीं था। बरेली में भी सुरेश शर्मा नगर पहली प्राइवेट कालोनी बनी। इस कालोनी को प्रेम प्रकाश ने बी.डी.ए. से पास कराया इस प्रकार सुरेश शर्मा नगर बरेली की पहली बी. डीए पास कालोनी हुई। उस समय बरेली वासियों के लिए बरेली में इतनी दूर घर बनवाना एक चुनौती के रूप में था लेकिन शायद भविष्य में शहर का विस्तार होना ही था तो लोगो ने इस पर भरोसा किया और इसका जब भूमि पूजन राम सिंह खन्ना द्वारा किया गया तब बरेली वासियों ने यहाँ अपने 'प्लाट बुक कराये। 1983 में कालोनी का पहला प्रारूप तैयार हुआ। यह सब सुरेश शर्मा नगर कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के तहत किया गया। इसमें नो प्राफिट नो लॉस के तहत 10 रूपये गज के हिसाब से प्लाट लोगो को दिए और बाद में यह प्लाट समय के सांथ 40 रूपये गज के हो गए थे, सुरेश शर्मा नगर की लोकप्रियता इतनी बड़ी थी कि पहले फेस वन फिर फेस टू और फेस श्री भी बी.डी.ए. से पास करवाकर और भी इसको एक्सटेंशन दिया गया। कालोनी में बड़े पार्क, मंदिर और बाजार की व्यवस्था भी रखी गई। यह बरेली शहर की पहली संगठित विकसित कालोनी बनी। दूर दूर तक इस कालोनी की चर्चा की गई। इसी के साथ श्री सुरेश शर्मा स्मारक विद्यापीठ की और सुरेश शर्मा स्मारक विद्यापीठ (एस.एस.वी.) की भी स्थापना की गई। छोटी बमनपुरी बरेली में तो एक विद्यालय चल ही रहा था अब सुरेश शर्मा नगर में एक बड़े स्कूल की योजना बनाई गई और पहले आठवीं तक का स्कूल सुरेश शर्मा स्मारक विद्यापीठ के नाम से खोला गया। 1980 में खोला गया यह स्कूल बाद में इंटर कालेज में परिवर्तित हो गया। यह उस समय बरेली के लिए न्यू बरेली की शुरूआत थी। 1995 तक यह कॉलोनी पूर्णतया डेवलप हो चुकी थी। इन सबको करने के लिए प्रेम प्रकाश शर्मा ने अपनी खेतीबाड़ी जमीदारी का हिस्सा सब खत्म कर दिया और भाई के हिस्से में अपना भी हिस्सा मिलाकर सुरेश शर्मा के नाम को जीवित करने का बीड़ा उठा लिया।
पहली बार ऐसा हुआ कि भाई के लिए एक स्मारक की स्थापना की गई। भाई की याद में बनाये स्मारक की चाबी हमेशा प्रेम प्रकाश शर्मा अपने पास रखा करते थे। इस स्मारक में भाई की स्मारिका भूमि पर बनाने के पहले उन्होंने अपनी स्मारिका भूमि पर बनवाई और घोषणा की कि मैं अपनी मृत्यु के बाद यहीं भाई के पास विश्राम लूँगा। उसके बाद उन्होंने अपनी स्मारिका के बराबर में भाई की स्मारिका बनवाई। इस स्मारक में एक तिजोरी भी प्रेम प्रकाश शर्मा ने लगवाई। जिसमें सुरेश चंद शर्मा की प्रवाहित की गई अस्थियों का मामूली अंश उन्होंने इसमें रखा और घोषणा की कि जब मेरी मृत्यु होगी तब मेरी अस्थियों में मेरे भाई की इन अस्थियों को मिलाकर प्रवाहित किया जाए तो इस प्रकार का मात्र प्रेम था प्रेम प्रकाश शर्मा का। इसी कॉलोनी में एक मंदिर विश्व शांति मंदिर के नाम से बनाया गया। इन प्राजेक्ट को पूरा करने में प्रेम प्रकाश शर्मा का साथ मंत्री रामसिंह
खन्ना और वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी ने साथ दिया। इसी कालोनी में एक मकान विद्यालय के पास प्रेम प्रकाश शर्मा ने बनवा दिया था। इस मकान में भाई के परिवार की सुरक्षा को देखते हुए इसको अभेद्य रूप से बनवाया गया। सुरेश चंद्र शर्मा की पत्नी और परिवार इस घर में 2005 में शिफ्ट हो गये। अंजली शर्मा का विवाह फरीदाबाद के अजय शर्मा से हुआ जो एक इंडिस्ट्रलियेस्ट है। छोटी बहन प्रोफेसर हो गई तो प्राफेसर निधि शर्मा का विवाह आगरा के अमित कौशिक से हुआ। साकेत सुधांशु का विवाह फरीदाबाद निवासी अंजलि शर्मा से हुआ इनके दो बेटे पुत्र श्रेय और अमोघ हैं। आज भी सुरेश चंद्र शर्मा की पत्नी ऊषा शर्मा ही इस विद्यालय की प्रिंसिपल हैं। अंजलि शर्मा अध्यक्ष हैं और साकेत सुधांशु विद्यालय के प्रबंधक हैं साकेत सुधांशु ने एम.बी.ए. एल.एल.बी., पी.जी. डी.सी.ए. किया हुआ है एडवोकेट हैं। आज शहर की राजनीति में भी वो अपना दखल रखते हैं। पिता की राजनीति का खून उनकी रगों में भी प्रवाहित होता है।
प्रेम प्रकाश शर्मा ने अपना पूरा जीवन दान सेवा के लिए दिया ही था तो बाकी अपनी भाई सुरेश शर्मा के देहावसान के पश्चात उन्होंने उनके परिवार के लिए अपने जीवन को न्यौछावर कर दिया और साथ ही बरेली शहर के लिए न्यू बरेली की शुरूआत भी की। आज जब रात में ट्रेन बरेली के स्टेशन पर रूकती है और यात्री बाहर आते हैं तब आटो वाले आवाज लगा रहे होते है कि सुरेश शर्मा नगर, सुरेश शर्मा नगर या फिर जब मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की फ्लीट बरेली के हवाई अड्डे की तरफ प्रस्थान कर रही होती है और पुलिस की वाईफाई पर आवाज गूंजती है कि काफिला सुरेश शर्मा नगर पहुँच गया है या सुरेश शर्मा नगर से निकलने वाला है तो प्रेम प्रकाश शर्मा का अपने भाई को लेकर सोचा हुआ सपना साकार हुआ लगता है कि फिजाओं मैं सुरेश चंद्र शर्मा का नाम बिखरा हुआ है। यह असली प्रेम है कि इस शिद्दत से सोचा जाए।
प्रेम प्रकाश शर्मा बड़े जिद्दी किस्म के इंसान थे। जो ठान लेते थे उसे पूरा करते थे। पायलट बाबा उन्हें बहुत मानते थे। सुरेश शर्मा नगर की स्थापना हो या विश्व शांति मंदिर, सुरेश शर्मा स्मारक हो या फिर सुरेश शर्मा स्मारक विद्यापीठ इन सबकी नींव पायलट बाबा के हाथ के द्वारा ही रखी हुई है। प्रेम प्रकाश शर्मा को अपनी मृत्यु का भी आभास था। अपनी मृत्यु के समय भी उन्होंने परिवार वालों को बुलाकर कहा कि अब मैं जा रहा हूँ और यह कहते हुए वह पीछे की तरफ गिर गए। 14 जनवरी 2021 मकर संक्रान्ति के दिन प्रेम प्रकाश शर्मा इस दुनिया को विदा कह गये। पूरे जीवन सात्विक तरीके से रहने वाले बहुत कम सामान में गुजारा करने वाले अपने भाई के प्रति समर्पित और बरेली शहर के भविष्य के लिए अनूठी योजना बनाने वाले प्रेम प्रकाश शर्मा का नाम कहीं भी नहीं लिखा हुआ है लेकिन वह बरेली शहर की धरोहर हैं। आज बरेली का जो नया स्वरूप है, बरेली शहर का नया विस्तार है वो बहुत पहले ही प्रेम प्रकाश शर्मा ने देख लिया था।
डा. राजेश शर्मा